Posts

ग्रामीण युवाओं के साथ एक सकरतमकता भरी यात्रा

Image
एक लंबे सफर के बाद, घुमावदार रास्तों पर घूमते हुए,  पहाड़ियों के पीछे जैसे ही गाँव के घर दीखने लगे, अनिल नें उसकी बाइक हमारी जीप के आगे लगा दी और रुकने के लिए इशारा किया। चारों तरफ दीख रही बंजर पहाड़ियों की ओर हाथ घुमाते हुए वो हमे बताने लगा कि एक समय यह ज़मीन हरी भरी थी और गाँव वाले यहाँ जानवर चराया करते थे। उसने बताया कि लगभग रोजाना राजपुर शहर से ट्रैक्टर आते हैं और यहाँ से मिट्टी खोद कर ले जाते हैं। बताते हुए, अनिल को बचपन कि यादें ताज़ा हो आयीं जब वो अपने दोस्तों के साथ हरी झाड़ियों वाले इस इलाके में जानवर चरने आता था और घंटों खेलता था।  इस खनन से चिंतित अनिल ने अपने कुछ दोस्तों को इन पहाड़ियों के संरक्षण कि अहमियत को समझाया और खनन रोकने के लिए तहसीलदार को एक पत्र लिखा। कुछ दिनों बाद भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई और काम चलता रहा तो अनिल व गोलु नें ट्रैक्टर पर काम करने वाले मजदूरों को समझाया जिनमें बहुत से इनके गाँव के ही थे। सभी को यह बात समझ आई कि यदि गाँव की गोचर ज़मीन खत्म हो जाएगी तो न तो जानवर चराने की जगह बचेगी न ही मरने के बाद जलाने के लिए लकड़ी। मरने के बाद जलाने क...

एक था खेमराज

Image
सभी युवा साथियों को खेमराज की कहानी जानना ज़रूरी है। पढ़ें और अपनी टिप्पणी लिखें। एक था खेमराज        - अमित The true revolutionary is guided by a great feeling of love. It is impossible to think of a genuine revolutionary lacking this quality. – Che Guevara   1982.  शायद जनवरी या फ़रवरी। राजसथान के SWRC -अब बेयरफ़ुट काॅलेज- का कदमपुरा फ़ील्ट सेन्टर। क्रांति और क्रांतिकारिता का पहला चेहरा, मेरे जीवन में, खेमराज का ही था। बाइस साल की उम्र में, खेमराज ही मेरे लिये स्पार्टाकस था और वह ही चे गुवेरा। खेमराज जो 300 रू तनख्वाह का अधिकांश हिस्सा पार्टी को चंदा दे देता था। खेमराज जो पाउडर भरने वाली बंदूक लेकर ट्रैक्टर पर रात भर घूमा, खरगोश मारने के लिये, क्योंकि अमित को खरगोश का माॅंस खिलाना था। खेमराज जो फ़ील्ड सेन्टर प्रमुख होने के बावजूद घण्टों तक सहकर्मियों के साथ हॅंसी ठठ्ठा कर लेता था। खेमराज जो लठ्ठ लेकर राजपूतों से अड़ जाता था क्योंकि उन्होने दलितों के लिये लगाये गए हैण्डपम्प पर कब्ज़ा कर लिया था और उतनी ही सह...

सीता - डर को जिसने निकाल फेंका

Image
गीता के इन्टरव्यू पर आधारित - अमित गीता अपनी नई व्हीलचेयर पा कर बेहद खुश है। खासतौर से इसलिये कि यह फ़ोल्डिंग वाली है। गीता का कहना है कि अब वो बस से कहीं भी जा सकती है। बस कंडक्टर से कह कर फ़ोल्डिंग चेयर उपर रखवा लेगी या अपने साथ सीट के पास ही रख लेगी। आधारशिला बालिका शिक्षण केन्द्र की संचालिका, सुमन जी, 40 डिग्री तपन में चित्तौड़ बाज़ार में घूमकर उसके लिये लाई हैं। दो दिवसीय शिविर के लिये मण्डी से सब्ज़ियाॅं लीं, फिर स्टेशनरी, कैन्सर से लड़ते पति की दवाइयाॅं लीं और इसी तरह की कुछ चीज़ें। उपर से इस व्हीलचेयर के चक्कर में और एक दो घण्टे लग गये। आज ही क्या ज़रूरी था यह व्हीलचेयर लेना? आज गीता शिविर में आयेगी तो खुश हो जायेगी। बहुत दिनों से मेरे पीछे पड़ी है फ़ोल्डिंग वाली व्हीलचेयर लाने के लिये। किसी मित्र ने इसके लिये पैसे भी भिजवा दिये थे। तो आज ही ले लेती हॅूं, सोचा। गीता, व्हीलचेयर पर बैठ कर इधर उधर घूम कर देख रही है कि यह ठीक है न। थोड़ी देर के बाद संतुष्ट होती है। हल्की है। नीचे पैर रखने वाला पार्ट भी नहीं है। इसकी ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि पैर तो हैं ही नहीं गीता के।   ...

मज़दूर दिवस

Image

बदलाव कैसे आयेगा

राकेश, राजस्थान समाज में क्रांति कैसे आयेगी, यह समाज का या हम सबका सबसे अहम मुद्वा है जो आसान नहीं है लेकिन असम्भव भी नहीं  है। समाज में क्रांति का कारण एक नहीं हो सकता है लेकिन हमें एक संगठन के माध्यम से एकजुट होकर क्रांति की राह पर कदम बढ़ाने चाहियें और उसे संभव बनाने का प्रयास करना चाहिए। हम लोगों को अपने प्रति सचेत होना चाहिए और अपने खिलाफ होने वाले शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारे संगठनों से अधिक से अधिक लोग जुड़ें और अपने कर्तव्य व अधिकारों को समझंे एवॅं उनको पाने के लिए हर संभव प्रयास करें।  भाइयों और बहनों आप यह सवाल अपने से ही पूछो और निर्णय लो कि क्या आपको समाज में होने वाली गड़बड़ी सही लगती हैं ? अगर नहीं सही लगती हैं तो एकजुट हो और इन गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाओ और संघर्ष करो।

नई क्रांति

केसर सिंह  आधारशिला शिक्षण केन्द्र, मध्य प्रदेश सृष्टि के क्रमिक विकास यानि बदलाव से ही आज हम इंसान  यहाँ    इक्ठठे होकर एक दूसरे से मिल पा रहे  हैं  । संसार के अलग-अलग कालों में लोगो ने अपने शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और  क्रांति  की राह पर चले जिसमें उन्होंने सफलता भी प्राप्त की। वर्तमान स्थिति में किसानों, मजदूरों, महिलाओं को अनेक  दुखों का सामना करना पड़ रहा है।  वे  लगातार समाज के पूंजीपति वर्ग  द्वारा शोषित होते जा रहें है। समाज के सभी शोषित वर्गो को एकजुट होते हुये पुनः नवीन क्राति की शुरूआत करनी चाहिए। भारत की करीब सत्तर प्रतिशत जनता गांव में निवास करती है। इतनी बड़ी संख्या है फिर भी 9 प्रतिशत डमरूधारी डमरू की आवाज पर सबको नचा रहे हैं। हमारे द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि पूंजीपतियों के साथ मिलकर हमारा शोषण करते हैं। आज मैं सभी कार्यकर्ताओं से आहवान् करता हूं। ग्राम स्वराज्य की स्थापना के लिए आपसी झगड़ों व अन्य समस्याओं के निदान हेतु ग्राम सभा को अपनायें। समाज में जो चल रहा है वह सही है या गलत, इसे समझने के लिये  वि...

भारत में मजदूरों की स्थिति

साथियों आज हमारे देश में मजदूरों की स्थिति बहुत ही खराब होती जा रही है। समाज में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को स्ंवय से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या वह मजदूरों की इस स्थिति से वाकिफ नही है या जानबूझ कर अन्जान बना हुआ है?  क्यांेकि आज भी हममें से कुछ लोग सोचते हैं कि यदि मज़दूरों को उनका हक मिला तो इससे हमारा नुकसान होगा। इसी सोच के चलते समाज का एक तबका इनके हकों की बात नहीं करता हैं। जो करते भी हैं उन्हें ज़ोर ज़बरदस्ती चुप करवा दिया जाता है। पर शायद हम ये नहीं सोचते कि उनको हक मिल जाये तो उनको हज़ारों समस्याओं से निजात मिल जाये। उनके घर और परिवार और बच्चों के चेहरो पर एक अलग सी खुशी देखने को मिलेगी। हम भूल जाते हैं कि वे भी हमारे भाई बहन हमारे अपने ही लोग हैं जो दूसरों को खुशी देकर खुद अपना जीवन दुःख भरा बिताते हंै। मज़दूर चाहे महिला हो या पुरूष, उनका शोषण किया जा रहा है। आर्थिक रूप से, मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से उनका शोषण किया जा रहा है। पर शायद हम भूल जाते हैं कि आज हमारे इन्हीं मजदूर भाई बहनों की वजह से हमारे देश की आर्थिक स्थिति मज़बूत हो रही है। फिर भी आज हमारे देश में हमार...