ग्रामीण युवाओं के साथ एक सकरतमकता भरी यात्रा
एक लंबे सफर के बाद, घुमावदार रास्तों पर घूमते हुए, पहाड़ियों के पीछे जैसे ही गाँव के घर दीखने लगे, अनिल नें उसकी बाइक हमारी जीप के आगे लगा दी और रुकने के लिए इशारा किया। चारों तरफ दीख रही बंजर पहाड़ियों की ओर हाथ घुमाते हुए वो हमे बताने लगा कि एक समय यह ज़मीन हरी भरी थी और गाँव वाले यहाँ जानवर चराया करते थे। उसने बताया कि लगभग रोजाना राजपुर शहर से ट्रैक्टर आते हैं और यहाँ से मिट्टी खोद कर ले जाते हैं। बताते हुए, अनिल को बचपन कि यादें ताज़ा हो आयीं जब वो अपने दोस्तों के साथ हरी झाड़ियों वाले इस इलाके में जानवर चरने आता था और घंटों खेलता था। इस खनन से चिंतित अनिल ने अपने कुछ दोस्तों को इन पहाड़ियों के संरक्षण कि अहमियत को समझाया और खनन रोकने के लिए तहसीलदार को एक पत्र लिखा। कुछ दिनों बाद भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई और काम चलता रहा तो अनिल व गोलु नें ट्रैक्टर पर काम करने वाले मजदूरों को समझाया जिनमें बहुत से इनके गाँव के ही थे। सभी को यह बात समझ आई कि यदि गाँव की गोचर ज़मीन खत्म हो जाएगी तो न तो जानवर चराने की जगह बचेगी न ही मरने के बाद जलाने के लिए लकड़ी। मरने के बाद जलाने क...