सीता - डर को जिसने निकाल फेंका
गीता के इन्टरव्यू पर आधारित - अमित गीता अपनी नई व्हीलचेयर पा कर बेहद खुश है। खासतौर से इसलिये कि यह फ़ोल्डिंग वाली है। गीता का कहना है कि अब वो बस से कहीं भी जा सकती है। बस कंडक्टर से कह कर फ़ोल्डिंग चेयर उपर रखवा लेगी या अपने साथ सीट के पास ही रख लेगी। आधारशिला बालिका शिक्षण केन्द्र की संचालिका, सुमन जी, 40 डिग्री तपन में चित्तौड़ बाज़ार में घूमकर उसके लिये लाई हैं। दो दिवसीय शिविर के लिये मण्डी से सब्ज़ियाॅं लीं, फिर स्टेशनरी, कैन्सर से लड़ते पति की दवाइयाॅं लीं और इसी तरह की कुछ चीज़ें। उपर से इस व्हीलचेयर के चक्कर में और एक दो घण्टे लग गये। आज ही क्या ज़रूरी था यह व्हीलचेयर लेना? आज गीता शिविर में आयेगी तो खुश हो जायेगी। बहुत दिनों से मेरे पीछे पड़ी है फ़ोल्डिंग वाली व्हीलचेयर लाने के लिये। किसी मित्र ने इसके लिये पैसे भी भिजवा दिये थे। तो आज ही ले लेती हॅूं, सोचा। गीता, व्हीलचेयर पर बैठ कर इधर उधर घूम कर देख रही है कि यह ठीक है न। थोड़ी देर के बाद संतुष्ट होती है। हल्की है। नीचे पैर रखने वाला पार्ट भी नहीं है। इसकी ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि पैर तो हैं ही नहीं गीता के। ...