शादी विवाह पर आर्थिक स्थिति

- नरेन्द्र लोहा

साथियों जिन्दाबाद शादी विवाह आज के समय में प्रतिस्पर्धा का बाजार बन चुका है, और इससे बहुत सारे बेकार के खर्च और समय की बर्बादी देखने को मिल रही है जिससे छोटे और निचले वर्ग के लोग कर्ज में डूब रहे है। धीरे-धीरे यह प्रचलन अभी सभी जगह बढता जा रहा है। लोग कर्जे के दबाव में आकर आत्म हत्या तक कर रहे है पर किसी के मन में यह बात नही आ रही है कि दहेज लेना और दहेज देना भी शादी में होने वाले खर्च को बड़ा रहा है। साथ ही साथ आधुनिक सजावट करना घर छोड कर बाहर शादी करना जिसमें आजकल होटल, बैकेट हाल बुक करवाये जाते है जिसमें अधिक खर्च आता है। साथियों यह बात हम सब को समझना है कि शादी विवाह दो परिवारों का मिलन है, प्रेम है तो हमें दिखावा प्रवृति को त्यागते हुये आपस में प्रेम से शादी विवाह का कार्य सम्पन्न करना चाहिए। जिससे हमारा बहुत सारा पैसा खर्चा होने से बच सकता है एंव हम लोगों की आर्थिक स्थिति और ज्यादा खराब न हो हमें इसका प्रयास करना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को ऐसे समारोह का बहिश्कार करना चाहिये।

                                                                       



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